3+ Hindi Emotional Moral Stories in Written | Students
Short Hindi Moral Stories in Written with Pictures | Kahaniya
जय हिंद भाईओ और बहनो। Sabse Bhadiya Kahaniya | Short Hindi Stories आज मैं फिर से एक नई कहानी के साथ आयी हूँ ।
यह कहानी लिखने क लिए मुझे बहुत जायदा समय लग गया तो आप comment section मैं अपना विचार रखना न भूले।
यह दो कहानियाँ मुझे तो बहुत पसंद आयी हो सकता है की आप लोगो को यह दो कहानियाँ थोड़ी बड़ी लगी पर मेरा विश्वास करिये यह कहानियाँ बहुत ही अच्छी है।
पहली कहानी का लक्ष्य है आपको परिवार का महत्व समझाना और दूसरी कहानी का लक्ष्य है आपको अपने अहंकार को आपके ऊपर हावी न होने देना।
यह दो कहानियाँ मुझे तो बहुत पसंद आयी हो सकता है की आप लोगो को यह दो कहानियाँ थोड़ी बड़ी लगी पर मेरा विश्वास करिये यह कहानियाँ बहुत ही अच्छी है।
पहली कहानी का लक्ष्य है आपको परिवार का महत्व समझाना और दूसरी कहानी का लक्ष्य है आपको अपने अहंकार को आपके ऊपर हावी न होने देना।
अरे सब यही बतादूंगी तो कहनी का मज़ा कैसे आएगा अब कहनी पढ़िए।
1. अपने परिवार के साथ वक़्त बिताएं
21 साल बाद एक आदमी अपनी माँ के साथ डेट पर जाने के अपने दिन के बारे में बता रहा था . . . शादी के 21 साल बाद मेरी पत्नी चाहती थी कि मैं किसी और औरत को खाने और फिल्म दिखाने बाहर ले जाऊँ ।
उसने कहा,
" मैं तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ, मगर मैं यह भी जानती हूँ कि यह दूसरी औरत तुम्हे बहुत प्यार करती हैं और तुम्हारे साथ जरूर कुछ वक्त बिताना चाहेंगी । "
वो आदमी अपने मन मैं सोच रहा था,
वो दूसरी औरत जिसके साथ मेरी पत्नी चाहती थी कि मैं वक्त बिताऊँ वह मेरी माँ थी, जो पिछले 19 सालों से एक विधवा का जीवन जी रही थीं, मगर मेरे काम और तीन बच्चों की मांगों के चलते मैं कभी - कभी ही उनसे मिलने जा पाता था ।
उस रात मैंने उन्हें खाने और फिल्म देखने चलने का न्योता देने के लिए, फ़ोन किया ।
उन्होंने पूछा, “ क्या हो गया, तबियत ठीक है ? ''
मेरी माँ उन लोगों में से हैं जिन्हें लगता है कि देर रात किया गया फोन या अचानक मिला न्योता बुरी खबर का अंदेशा है ।
मैंने कहा, ' मैंने सोचा आपके साथ कुछ समय बिताना अच्छा रहेगा " सिर्फ हम दोनों । '
उन्होंने कुछ देर सोचा और कहा, ' मैं बहुत खुशी हूँ। उस शुक्रवार जब मैं काम के बाद उन्हें लेने जा रहा था मैं कुछ घबराया हुआ था ।
जब मैं उनके घर पहुंचा तो देखा वो भी हमारी डेट को लेकर कुछ शंका में थी ।
वो दरवाजे पर अपना शाल पहने खड़ी थी | उन्होंने अपने बाल सुन्दर तरह से बनाये थे और अपनी शादी की पिछली सालगिरह पर जो सारे थी वो वह पहन रखी थी |
जब वो मुझे देख कर मुस्कुरायी तो लगा कोई फरिश्ता खड़ा है ।
कार में बैठते हुए उन्होंने कहा, ' जब मैने अपने दोस्तो को बताया कि मैं अपने बेटे के साथ बाहर जा रही है, तो वे सुन कर बहुत खुश हुए वो सब हमारी मीटिंग के बारे में जानने के लिए उत्सुक हा हम एक होटल में पहुंचे, जो बहुत आलिशान तो नहीं था मगर अच्छा था '
मेरी माँ ने मेरा हाथ मेरी कोहनी से ऐसे थामा मानो वो देश की पहली महिला हो ।
बैठने के बाद मुझे मेनू पढ़ना या उन्हें सिर्फ बड़ा - बड़ा ही दिखता था पढ़ते - पढ़ते जब मैने आँख उठा कर ऊपर देखा तो माँ मुझे ही देख रही थी ।
'उनके होठों पर मुस्कान थी '
जब तुम छोटे थे तब में ऐसे तुम्हे मेनू पढ़ कर सुनाया करती थी, उन्होंने कहा तो फिर अब समय है कि आप आराम से बैठो और मैं आपके लिए ये करूँ, " मैंने जवाब दिया |
खाने के दौरान हमने काफी बातें की कुछ खास नहीं बस एक दूसरे की ज़िन्दगी में क्या नया चल रहा है ये कहा सुना। हमने इतनी बातें कीं कि फिल्म ही छट गई ।
बाद में जब मैं उन्हें घर छोड़ने गया तो उन्होंने कहा,
"मैं तुम्हारे साथ फिर से बाहर चलूंगी बशर्ते तुम मुझे न्योता देने दो । " मैं मान गया |
''कैसी रही तुम्हारी डेट ?” घर पहुंचने पर बीवी ने पूछा मेरी और माँ क बारे मैं 'बहुत अच्छी | उम्मीद से कहीं बेहतर ' मैने बताया |
कुछ दिन बाद, मेरी माँ एक बड़े दिल के दौरे के साथ गुजर गई । सब कुछ इतनी जल्दी हो गया कि मैं उनके लिए कुछ कर भी नहीं पाया |
कुछ दिन बाद मुझे एक लिफ़ाफ़ा मिला जिसमे जिस होटल में हमने खाना खाया था वहाँ की रसीद थी ।
साथ में एक नोट था जिसमे लिखा था :
''मैंने इसका बिल पहले ही भर दिया है । पता नहीं मैं वहाँ हो पाऊँगी या नहीं ; मगर कोई बात नहीं, मैंने दो लोगों के पैसे भरे हैं - तुम्हारे और तुम्हारी पत्नी के तुम नहीं समझ पाओगे वो रात मेरे लिए क्या मायने रखती है । मैं तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ, बेटे | "
उस वक्त मुझे एहसास हुआ की समय पर ' मैं तुम्हे प्यार करता हूँ कहना और अपनों को समय देना कितना ज़रूरी है । जीवन में परिवार से बढ़के कुछ नहीं है ।
आप आराम से बैठो और मैं आपके लिए ये करूँ, " मैंने जवाब दिया ।
उन्हें वो वक्त दीजिये जिसपर उनका हक़ है, क्योंकि ये वो चीजें हैं जो फिर कभी नहीं टाली जा सकती ।
वो आदमी अपने मन मैं सोच रहा था,
2. घमंडी चोर (Egotistical Thief)
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| Hindi Moral Stories in Written |
आर्थर बैरी नाम का एक चोर था । वो हीरे - जवाहरात चुराता था ।
देश - विदेश में उसकी ख्याति थी कि उससे बेहतर कोई चोर कभी हुआ ही नहीं । वो सिर्फ एक कामयाब चोर नहीं था, उसके हाथ में कला थी |
ये उसके सर इतना चढ़ गया था कि वो घमंडी हो गया था और ये ही हर किसी के यहाँ चोरी नहीं करता था ।
ये उसके सर इतना चढ़ गया था कि वो घमंडी हो गया था और ये ही हर किसी के यहाँ चोरी नहीं करता था ।
उसके ' प्रत्याशियों ' के पास सिर्फ पैसा और जवाहरात होना ही जरूरी नहीं था बल्कि उनका नाम समाज के उच्च लोगों में शामिल होना भी ज़रूरी था |
एक रात बैरी चोरी करते हुए पकड़ा गया और उसे तीन गोलियां लगीं । शरीर में गोलियां, आँखों में कांच के टुकड़े और असहनीय दर्द के होते उसने एक अभूतपूर्व बात कही :
“ मैं अब यह और नहीं करूँगा । "
उसे गिरफ्तार कर लिया गया और अट्ठारह साल की जेल हुई। जब वह बाहर निकला उसने अपनी बात रखी |
एक रात बैरी चोरी करते हुए पकड़ा गया और उसे तीन गोलियां लगीं । शरीर में गोलियां, आँखों में कांच के टुकड़े और असहनीय दर्द के होते उसने एक अभूतपूर्व बात कही :
“ मैं अब यह और नहीं करूँगा । "
उसे गिरफ्तार कर लिया गया और अट्ठारह साल की जेल हुई। जब वह बाहर निकला उसने अपनी बात रखी |
वो दुबारा जवाहरात चुराने की ज़िन्दगी में नहीं लौटा । बल्कि वो न्यू इंग्लैंड शहर में जा कर एक आदर्श जिन्दगी जीने लगा।
शहर के लोगों ने उसे सम्मानित करने के लिए स्थानीय सेवानिवृत सैनिक समिति का कमांडर बना दिया |
शहर के लोगों ने उसे सम्मानित करने के लिए स्थानीय सेवानिवृत सैनिक समिति का कमांडर बना दिया |
समय के साथ बात फैली कि मशहूर जवाहरात चोर आर्थर बैरी । कमांडर बन गया है । दुनियाभर से पत्रकार उस छोटे से शहर में उसका इंटरव्यू लेने आए।
उन्होंने उससे बहुत से सवाल किये और अंत में एक जवान पत्रकार ने मुद्दे की बात की और सबसे खास सवाल पूछा,
" मिस्टर बैरी, आपने अपनी चोरी की जिन्दगी में बहुत से रईस लोगों के यहाँ चोरी की मगर क्या आपको याद है आपने सबसे ज्यादा किस के यहाँ से चुराया ? "
बिना एक पल गंवाए, बैरी ने कहा,
" आसान है, जिससे मैंने सबसे ज्यादा चुराया वो आर्थर बैरी है । मैं एक कामयाब व्यापारी, या वाल स्ट्रीट पर संत और समाज को कुछ देने वाला कुछ भी बन सकता था पर मैंने एक चोर की ज़िन्दगी चुनी और अपनी ज़िन्दगी का जेल में बिताया ।
हाँ ! आर्थर बैरी वो चोर था जिसने सचमुच खुद से चुराया।
(सत्य घटना)
खिलाड़ी ग्लेन कनिंघम की सच्ची कहानी जो 8 साल की उम्र में स्कूल में लगी एक आग में बुरी तरह से जल गया था| डॉक्टरों ने कह दिया था कि वे अब कभी चल नहीं पाएंगे|
चलने के लिए दृढ़, ग्लेन अक्सर खुद को व्हील चेयर से गिरा देते और प्रांगन से घसीट कर अपने शरीर को बहार तक ले जाते बाईस महीनों बाद। उन्होंने अपना पहला कदम रखा, और केवल अपने दृढ़ निश्चय के बल पर दर्द के बाद भी दौड़ना सीखे|
वहाँ का स्कूल छोटा सा था जहाँ पुराने समय के कोयले की अंगीठी जलाई जाती थी|
उन्होंने उससे बहुत से सवाल किये और अंत में एक जवान पत्रकार ने मुद्दे की बात की और सबसे खास सवाल पूछा,
" मिस्टर बैरी, आपने अपनी चोरी की जिन्दगी में बहुत से रईस लोगों के यहाँ चोरी की मगर क्या आपको याद है आपने सबसे ज्यादा किस के यहाँ से चुराया ? "
बिना एक पल गंवाए, बैरी ने कहा,
" आसान है, जिससे मैंने सबसे ज्यादा चुराया वो आर्थर बैरी है । मैं एक कामयाब व्यापारी, या वाल स्ट्रीट पर संत और समाज को कुछ देने वाला कुछ भी बन सकता था पर मैंने एक चोर की ज़िन्दगी चुनी और अपनी ज़िन्दगी का जेल में बिताया ।
हाँ ! आर्थर बैरी वो चोर था जिसने सचमुच खुद से चुराया।
दृढ़ता की ताकत (Power of Strength)
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| Hindi stories on moral values |
चित्र स्तोत्र: Shutterstock
खिलाड़ी ग्लेन कनिंघम की सच्ची कहानी जो 8 साल की उम्र में स्कूल में लगी एक आग में बुरी तरह से जल गया था| डॉक्टरों ने कह दिया था कि वे अब कभी चल नहीं पाएंगे|
चलने के लिए दृढ़, ग्लेन अक्सर खुद को व्हील चेयर से गिरा देते और प्रांगन से घसीट कर अपने शरीर को बहार तक ले जाते बाईस महीनों बाद। उन्होंने अपना पहला कदम रखा, और केवल अपने दृढ़ निश्चय के बल पर दर्द के बाद भी दौड़ना सीखे|
वहाँ का स्कूल छोटा सा था जहाँ पुराने समय के कोयले की अंगीठी जलाई जाती थी|
एक छोटे बच्चे की ज़िम्मेदारी थी जल्दी आ कर उसे जलाने की ताकि उसके साथियों और टीचर के आने के पहले कमरा गर्म हो जाए|
एक दिन वे सुबह आए तो देखा पूरे स्कूल में आग लगी हुई है।
एक दिन वे सुबह आए तो देखा पूरे स्कूल में आग लगी हुई है।
उन्होंने बच्चे को आग में से जब निकाला तब वो ज़िन्दा कम, मरा हुआ ज्यादा था|
उसका निचला शरीर बहुत जल चुका था और उसे तुरंत वहाँ के अस्पताल ले जाना पड़ा।
अपने बिस्तर से बुरी तरह जले हुए उस बच्चे ने बेहोश हालत में डॉक्टर को अपनी माँ से बात करते हुए सुना। डॉक्टर कह रहे थे कि, वो निश्चित ही मर जायेगा और शायद वही अच्छा भी है-क्योंकि आग ने उसका निचला बदन बुरी तरह झुलसा दिया है।
मगर वह बहादुर बच्चा मरना नहीं चाहता था| उसने मन में ठान लिया कि वह ज़िन्दा रहेगा|
अपने बिस्तर से बुरी तरह जले हुए उस बच्चे ने बेहोश हालत में डॉक्टर को अपनी माँ से बात करते हुए सुना। डॉक्टर कह रहे थे कि, वो निश्चित ही मर जायेगा और शायद वही अच्छा भी है-क्योंकि आग ने उसका निचला बदन बुरी तरह झुलसा दिया है।
मगर वह बहादुर बच्चा मरना नहीं चाहता था| उसने मन में ठान लिया कि वह ज़िन्दा रहेगा|
और डॉक्टर भी हैरान थे, वह वाकई ज़िन्दा बच गया|
जब बड़ा खतरा टल चुका था, उसने एक बार फिर डॉक्टर को अपनी माँ से बात करते सुना।
वह माँ को कह रहे थे कि, क्योंकि आग में उसका काफी मॉस जल चुका है, अच्छा होता अगर वह मर जाता, क्योंकि अब जिंदगी भर के लिए वह अपाहिज रह जायेगा और अपने पैरों का कभी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा|
एक बार फिर उस बहादुर बच्चे ने अपना मन बना लिया वो अपाहिज नहीं रहेगा| वो चलेगा|
वह माँ को कह रहे थे कि, क्योंकि आग में उसका काफी मॉस जल चुका है, अच्छा होता अगर वह मर जाता, क्योंकि अब जिंदगी भर के लिए वह अपाहिज रह जायेगा और अपने पैरों का कभी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा|
एक बार फिर उस बहादुर बच्चे ने अपना मन बना लिया वो अपाहिज नहीं रहेगा| वो चलेगा|
मगर अफ़सोस कि कमर से नीचे उसे कुछ महसूस नहीं हो सकता था| उसके पतले पैर बस टंगे रहते थे, बेजान|
अस्पताल से उसका मन बहलाने क लिए हर रेज उसकी माँ उनके छोते छोते रों की मालिश करती मंगर वो कुछ महसूस नहीं कर पाता, कुछ काम नहीं कर पाता।
अस्पताल से उसका मन बहलाने क लिए हर रेज उसकी माँ उनके छोते छोते रों की मालिश करती मंगर वो कुछ महसूस नहीं कर पाता, कुछ काम नहीं कर पाता।
और उसका संकल्प कि वह चलेगा तैसा का तैसा ही रह गया लेकिन वो हार मानाने वालो मैं से नहीं था ।
जब तक पलंग पर नहीं होता था तो व्हीलचेयर पर होता था। एक सुनहरे दिन था की माँ उसे चौक में खुली हवा खिलाने की आई। उस दिन, वहाँ के रहने की बजाय, उसने युद को चौक में फेंक दिया। वह घास मे खुद को घसीटता रहा|
ऐसे करते करते वह सफेद बाइक तक जा पहुँचा।
जब तक पलंग पर नहीं होता था तो व्हीलचेयर पर होता था। एक सुनहरे दिन था की माँ उसे चौक में खुली हवा खिलाने की आई। उस दिन, वहाँ के रहने की बजाय, उसने युद को चौक में फेंक दिया। वह घास मे खुद को घसीटता रहा|
ऐसे करते करते वह सफेद बाइक तक जा पहुँचा।
बहुत हिम्मत जुटा कर उसने खुद को बाइक के सहारे खड़ा कर लिया।
फिर जरा जरा कर के चलने के लिए वह खुद को बाइक के साथ साथ चलाता रहा।
फिर जरा जरा कर के चलने के लिए वह खुद को बाइक के साथ साथ चलाता रहा।
वह हर रोज यह करने लगा जब तक कि उसने बाइक के साथ-साथ अपने लिए रास्ता साफ नहीं कर लिया। अगर वह कुछ चाहता था तो केवल अपने पैरों पर चलना।
आखिरकार रोज की मालिश और उसके दृढ़-संकल्प के साथ उसने खड़े होना सीख लिया।
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आखिरकार रोज की मालिश और उसके दृढ़-संकल्प के साथ उसने खड़े होना सीख लिया।
Conclusion:
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Wow bro kitni mast story hai keep it up
ReplyDeleteWahh bhai kitni mast stories thi ek maine apni book mai chaap diya!
ReplyDeleteAmazing bro what a story
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